विद्यालय में मिड-डे मील
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। परंतु यह तभी सार्थक है जब विद्यार्थी स्वस्थ और पोषित हों। हमारे देश में अनेक ऐसे बच्चे हैं जो गरीबी और कुपोषण के कारण विद्यालय आने से कतराते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने विद्यालयों में “मिड-डे मील योजना” प्रारंभ की, ताकि प्रत्येक बच्चे को पढ़ाई के साथ-साथ दोपहर का भोजन भी प्राप्त हो सके। इस योजना को और अधिक प्रभावी बनाने में कई सामाजिक संस्थाएँ भी आगे आईं। उन्हीं में से एक है हेवेल्स इंडिया – QRG फ़ाउंडेशन , जिसने विद्यालयों में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराकर शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों को सशक्त बनाने का प्रशंसनीय कार्य किया है। मिड-डे मील योजना का महत्व मिड-डे मील केवल भोजन उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह बच्चों को विद्यालय से जोड़ने और उनमें शिक्षा के प्रति रुचि पैदा करने का एक सशक्त माध्यम है। भूखे पेट बच्चे कक्षा में ध्यान नहीं लगा पाते। लेकिन जब उन्हें भरपेट और पौष्टिक भोजन मिलता है तो उनका मन पढ़ाई में लगने लगता है। इस योजना से न केवल बच्चों का स्वास्थ्य स...